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चंद्रहासिनी मंदिर चंद्रपुर और महानदी में बोटिंग

महानदी के तट पर बसा चंद्रपुर चंद्रहासिनी मंदिर महानदी और नाथल दाई मंदिर के कारण बहुत प्रसिद्ध है। इन मंदिरों के कारण इस जगह का बहुत महत्व है और लोग आस्था के नाम पर भी यहां दूर-दूर से आते हैं। उड़ीसा के पर्यटकों को भी आए दिन यहां देखा जाता रहा है। चंद्रपुर हालांकि जांजगीर-चांपा जिले में आता है पर यहाँ की दूरी रायगढ़ से मात्र 29 किलोमीटर होने के कारण आए दिन रायगढ़ के पर्यटक यहां भी पहुंचते रहते हैं। 

चंद्रपुर में भी मोटे तौर पर पुल के इस पार और पुल के उस पार दो हिस्से हैं जहां पर्यटक दोनों तरफ आना-जाना करते हैं।  पुल के इस पार चंद्रहासिनी देवी का मंदिर है जहां लोग पूजा पाठ करने जाते हैं। चंद्रहासिनी देवी का मंदिर भी बहुत सुंदर है ऊपर में मंदिर के आसपास थोड़ी सी पार्क जैसी जगह भी है जहां लोग बैठकर सुस्ता भी लेते हैं । यह मंदिर थोड़ी ऊंचाई पर है और बगल से महानदी भी बहती है इसलिए वहां से चारों तरफ का दृश्य बहुत सुंदर दिखाई पड़ता है।

चंद्रहासिनी देवी मंदिर से पूजा पाठ करके जब आप उतरते हैं और पुल के उस पार जाते हैं तो नदी के उस छोर पर नाथल दाई का मंदिर है और बहुत से पर्यटक वहां पिकनिक स्पॉट के रूप में उस जगह का उपयोग करते हैं । वहां पर जाने के बाद नदी के तट पर पैसे देकर बोटिंग की भी व्यवस्था है ।  अगर आप चंद्रपुर गए हैं और आपने आज तक महानदी में वोटिंग का आनंद नहीं लिया है तो पर्यटन के एक बड़े मजेदार हिस्से से आप अभी तक वंचित हैं । नदी का वह किनारा पर्यटकों से भरा रहता है इसलिए  वहां पर स्वच्छता की थोड़ी कमी जरूर नजर आती है । फिर भी एक जगह तलाशकर हमने पिकनिक का आनंद लिया । हम सब ने भोजन के बाद वोटिंग का आनंद लिया। महानदी में वोटिंग करने का आनंद अपने आप में एक सुखद अनुभव जैसा है।

चंद्रपुर में जो बस स्टैंड का एरिया है वहां काफी भीड़ भाड़ होती है। बहुत सारे भोजनालय और बहुत सारे रेस्टोरेंट भी वहां  हैं ,इसलिए पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं होती। चंद्रहासिनी देवी मंदिर तक जाते हुए बाजार का जो सुंदर दृश्य है वह भी लुभाता है। हमने वापसी में वहां कुछ खरीददारी भी की। वैसा ही बाजार नाथल दाई मंदिर क्षेत्र में नदी के उस किनारे पर भी आपको मिलेगा। वहां का बाजार थोड़ा बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। लोग घूम घूम कर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं वहां खरीदते हैं। वह क्षेत्र थोड़ा सड़क से नीचे है इसलिए वहां चार पहिया गाड़ी उतारने के लिए कुशल चालक की जरूरत महसूस होती है। गाड़ी उतारने के लिए बहुत ढलान रास्ता है और घुमावदार भी है साथ ही दोनों तरफ से गाड़ियां आती जाती रहती हैं इसलिए थोड़ी असहजता महसूस होती है। 


पर्यटन के हिसाब से एकाध दिन यहां आराम से गुजारा जा सकता है। अगर आप यहां आएं तो यहां आकर बोटिंग करना बिलकुल भी न भूलें।

चंद्रहासिनी मंदिर में प्रवेश के समय लोगों की जिस तरह कतारें लगी होती हैं , ऊपर की ओर जाती सीढ़ियों में लोग जिस तरह एक के पीछे एक चढ़ते हुए और जयकारा लगाते हुए चलते हैं वह दृश्य मन में उतर जाता है।

पहाड़ी के ऊपर चंद्रहासिनी देवी के मंदिर का अगल बगल का जो क्षेत्र है वहां भी कल्पवृक्ष के रूप में महिलाएं पुरुष मनोकामना पूर्ण करने के लिए धागा बांधते हैं । उस पहाड़ी के ऊपर से नदी के साथ-साथ पूरा जो क्षेत्र है उसका नजारा आंखों में ऊतर सा जाता है । उस नजारे को हर पर्यटक अपने साथ घर तक लेकर आता है । उन दृश्यों के कारण चंद्रपुर हमेशा पर्यटकों को याद आता रहता है।


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