सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

'कोरोना की डायरी' का विमोचन


"समय और जीवन के गहरे अनुभवों का जीवंत दस्तावेजीकरण हैं ये विविध रचनाएं"  

छत्तीसगढ़ मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन जिला इकाई रायगढ़ के अध्यक्ष सुशीला साहू के सम्पादन में प्रकाशित किताब 'कोरोना की डायरी' में 52 लेखक लेखिकाओं के डायरी अंश संग्रहित हैं | इन डायरी अंशों को पढ़ते हुए हमारी आँखों के सामने 2020 और 2021 के वे सारे भयावह दृश्य आने लगते हैं जिनमें किसी न किसी रूप में हम सब की हिस्सेदारी रही है | किताब के सम्पादक सुश्री सुशीला साहू जो स्वयं कोरोना से पीड़ित रहीं और एक बहुत कठिन समय से उनका बावस्ता हुआ ,उन्होंने बड़ी शिद्दत से अपने अनुभवों को शब्दों का रूप देते हुए इस किताब के माध्यम से साझा किया है | सम्पादकीय में उनके संघर्ष की प्रतिबद्धता  बड़ी साफगोई से अभिव्यक्त हुई है | सुशीला साहू की इस अभिव्यक्ति के माध्यम से हम इस बात से रूबरू होते हैं कि किस तरह इस किताब को प्रकाशित करने की दिशा में उन्होंने अपने साथी रचनाकारों को प्रेरित किया और किस तरह सबने उनका उदारता पूर्वक सहयोग भी किया | कठिन समय की विभीषिकाओं से मिलजुल कर ही लड़ा जा सकता है और समूचे संघर्ष को लिखित रूप में सामने लाकर ही समाज में लोक संघर्ष की स्थापना की जा सकती है , यह किताब इस बात का प्रमाण भी है | 

अनुभव सबसे बड़ा गुरू होता है जिससे हम सीखते हैं और भविष्य को सुन्दर बनाने के लिए सबक लेते हैं | इस किताब में प्रकाशित प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर उमेश कुमार पाण्डेय जी का आलेख 'महामारी एक सबक' इस बात के लिए प्रेरित करता है कि किस तरह कठिन समय के अनुभवों के माध्यम से हम कुछ सबक लेकर भविष्य में सचेत रह सकते हैं और अपने जीवन को आसान और सुन्दर बना सकते हैं | आशा पाण्डेय जी का आलेख 'कोरोना काल के वो सत्रह दिन और सत्रह रातें' जीवन में अचानक आयी विपत्ति के बिरूद्ध संघर्ष करने के लिए हमें प्रेरित करता है| किस तरह उस कठिन समय का सहजता और हिम्मत के साथ उन्होंने सामना किया, उसका एक जीवंत लेखा जोखा इस आलेख के माध्यम से पाठकों तक पहुंचता है | 

साथी रचनाकार श्याम नारायण श्रीवास्तव जी किताब के प्राक्कथन में डायरी विधा पर प्रकाश डालते हुए इस विधा की महत्ता के महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपनी बात रखते हैं जिसके माध्यम से किताब को आगे पढ़ने की एक जिज्ञासा उत्पन्न होने लगती है |इसी किताब में उनकी एक कहानी 'एक दिन की बात' भी संग्रहित है | यह कहानी कोरोना काल के मूर्त और अमूर्त दोनों ही प्रकार की घटनाओं का एक सूक्ष्म विश्लेषण करती हुई आगे बढ़ती है | कहानी का अंत बहुत मार्मिक है जहां कोरोना काल पर लेखकों से कहानियाँ मांगकर किताब के रूप में दस्तावेजीकरण करने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति स्वयं कोरोना की भेंट चढ़ गया | लेखक से मांगी गयी  कहानी को पढने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति उसे बिना पढ़े ही दुनिया से कूच कर जाए और लेखक को उस व्यक्ति के बेटे द्वारा फोन के माध्यम से उसकी मृत्यु की सूचना मिले तो यह एक विकट और दुःखद स्थिति है | यह कहानी, कहानी न होकर सच लगती है क्योंकि कोरोना काल में इस तरह की अनेक घटनाओं से हम सब रुबरू भी हुए हैं।

किताब में संग्रहित जयन्ती खम्हारी का आलेख 'कोरोना काल में मृत्यु एक पहेली' में उन बातों की ओर इशारा किया गया है जो उन कठिन दिनों में हमारी समझ से बाहर होती रही हैं |  मृत्यु उन दिनों एक पहेली जैसी ही रही है | घर में बंद आदमी को कब किसकी मृत्यु की खबर मिल जाए , यह एक पहेली की तरह ही बनी रही है| मृत्यु को लेकर एक आक्रांत कर देने वाले भय के बीच हम सबका समय इस तरह व्यतीत होता रहा है कि उसको बूझ पाना हमारे बस की बात ही नहीं रही है | जयन्ती खम्हारी जो एक शिक्षिका भी हैं , बतौर लेखिका उन्होंने कोरोना काल के उस कठिन दौर को इस डायरी अंश के माध्यम से भली भांति चिन्हित किया है |



लेखिका गीता उपाध्याय जो एक शिक्षिका भी हैं, समय के त्रास को भली भांति पहचानती हैं|अपने डायरी अंश 'कोरोना महामारी का त्रास' के माध्यम से उस दौर में विपत्ति बनकर आये मनुष्य जीवन के असीमित दुःखों की ओर हमें साथ लिए चलती हैं | सहज शब्दों के माध्यम से दुःख दर्द से भेंट करा देने की उनकी कोशिश हमें दुःख, दर्द, करूणा और दया जैसे मानवीय मूल्यों से भर देती है | कठिन दौर में हम एक दूसरे की सहायता के लिए किस तरह तत्पर रहें, उसके माध्यम से गीता उपाध्याय अपने डायरी अंश के माध्यम से प्रेरित करती हैं।




उस दौर को याद करिए कि किस तरह शिक्षा व्यवस्था में संकट आया और किस तरह अध्यापकों, अध्यापिकाओं ने शिक्षा व्यवस्था पर आये संकट को दूर करने के लिए ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से अपना अमूल्य योगदान दिया | इस 'कोरोना की डायरी' में भी ऎसी बातों को रखने में हमारे रचनाकार साथियों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है | 

यह एक भरोसे जगाने वाली बात है कि इस किताब के अधिकाँश रचनाकार अध्यापन के पेशे से जुड़े हुए हैं | चूँकि अध्यापकों, अध्यापिकाओं को कोरोना के दौर में भिन्न भिन्न किस्म के अनगिनत अनुभवों से गुजरना पड़ा और इन अनुभवों ने कभी उन्हें असहज भी किया तो कभी भीतर से द्रवित भी कर दिया |उनके ऐसे विरले अनुभवों को इस किताब में हम पढ़ते हैं और उस कठिन समय से हमारा एक परिचय भी होता है |

कोई किताब एक कठिन दौर के अनुभवों से हमें परिचित कराये तो उसकी विश्वसनीयता बढ़ जाती है | इस किताब में संग्रहित रचनाओं के रचनाकार भानुप्रताप मिश्रा, प्रो.के के तिवारी , आनंद सिंघनपुरी संतोष कुमार पैंकरा, संजय बोहिदार,हितेंद्र पाण्डेय , संतोष मिरी, ऋषि वर्मा ,दिलीप गुप्ता,संजय पटेल,पूनम दुबे , रजनी वैष्णव , रामप्रकाश यादव,सुधा देवांगन,धनेश्वरी देवांगन, प्रुरुषोत्तम गुप्ता, विनोद डडसेना,मार्गरेट कुजूर,माधवी चक्रवर्ती ,अजय पटनायक,गुलशन खम्हारी,सुखमती चौहान,नीरा साहू , हेमलता चंद्रा,आरती गुप्ता , जयन्ती पटेल,अन्जय कुमार सूर्यवंशी, विजय कुमार पाण्डेय, पुष्पा पटनायक, आरती मेहर,पद्म्मुख पंडा,जमुना प्रसाद चौहान,सुखदेव राठिया,प्रो.मंजरी अरविन्द गुरू,सीमा गुप्ता, सावित्री मिश्रा,नलिनी प्रभा बाजपेयी , हरेन्द्र डनसेना , कन्हैया लाल गुप्ता , सुकेशी प्रधान ,  अंजना सिन्हा , यदुमणि चौहान , रुक्मणि सिंह राजपूत , भोगी लाल गुप्ता , श्रेया वैष्णव ने अपनी अपनी रचना के माध्यम से किताब को समृद्ध बनाने में अपनी जो भूमिका तय की है वह उल्लेखनीय है | इन समस्त लेखकों लेखिकाओं  की रचनाओं में एक बात की समानता नज़र आती है कि ये समस्त रचनाएं उस कठिन दौर के अनुभवों से प्राप्त संघर्षों को लेकर अपने पाठकों से संवाद करना चाहती हैं | हरेक के पास कुछ न कुछ ऐसा अनुभव है जो उनकी रचनाओं के माध्यम से पाठकों तक पहुंचकर उस दौर की विभीषिकाओं और उस दौर के जीवन संघर्षों से उन्हें परिचित कराता है और उन्हें बुरे समय से दम ख़म के साथ लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित भी करता है | शिक्षिका एवं रचनाकार सुशीला साहू जी के सम्पादन में प्रकाशित  'कोरोना की डायरी' संग्रह  के समस्त रचनाकारों ने एक तरह से एक ख़ास समय के दस्तावेजीकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते  हुए शब्दों के माध्यम से अपने अनुभवों को साझा किया है | शब्दों के इस तरह के साझेपन से ही समाज में एक नयी जमीन तैयार हो सकती है जिसे समय के साथ और अधिक उर्वर भी बनाया जा सकता है | एक आकर्षक गेटअप के साथ  सुसज्जित रूप में सामने आई  इस किताब में शामिल अधिकांश नए रचनाकारों को प्रोत्साहित किये जाने के लिए भी इस किताब का स्वागत होना चाहिए और इसे जरूर पढ़ा जाना चाहिए | 


साझा डायरी संग्रह : कोरोना की डायरी 

सम्पादक : सुशीला साहू 

प्रकाशक : निष्ठा प्रकाशन गाजियाबाद उत्तरप्रदेश

मूल्य : 250 रुपये


---------------------------------------------------

समीक्षक 

रमेश शर्मा 

92 श्रीकुंज , बोईरदादर रायगढ़ छत्तीसगढ़, मो.7722975017

टिप्पणियाँ

  1. समीक्षा के माध्यम से किताब " कोरोना की डायरी" के संबंध में पढ़कर अच्छा लगा। इस तरह के साझे प्रयासों से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है और समाज उन्नत होता है। सबको बधाई। अनुग्रह बेहतर काम कर रहा है।

    जवाब देंहटाएं
  2. कोरोना काल के अनुभवों पर आधारित इस किताब का प्रकाशन एक उत्कृष्ट कार्य है। इस पर लिखी समीक्षा से किताब को लेकर पाठकों में इसे पढ़ने की जिज्ञासा जरूर उतपन्न होगी। बधाई

    जवाब देंहटाएं
  3. सादर अभिवादन , सुंदर समीक्षा किया गया है, सभी विषय वस्तुओं पर आपकी समीक्षात्मक टिप्पणी रही है,

    डॉक्टर उमेश पांडेय

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभार सर। आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

      हटाएं
  4. कोरोना की डायरी की समीक्षा पढ़कर बहुत अच्छा लगा , दरअसल इसके लेखों को संकलन से प्रकाशन तक बहुत कुछ सम्पादक के साथ मैं भी रहा , मेहनत सफल हुई , हार्दिक धन्यवाद , जो लोग पढना चाहते हैं , उन्हें किताब मिल जाएगी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका हार्दिक धन्यवाद।छोटे छोटे साझे रचनात्मक प्रयासों से ही समाज बदलता है।आप लोगों का यह प्रयास सराहनीय है।।

      हटाएं
  5. बेनामी24 फ़रवरी 2023 को 8:14 pm बजे
    सम्माननीय श्री रमेश शर्मा जी, सद्यःविमोचित साँझा लेख संग्रह कोरोना डायरी जिसमें कोरोनाकाल की पीड़ाओं की अभिव्यक्ति के रूप में,उस काल कीअनुभूतियों, स्थिति-परिस्थितियों के चित्रण का हमारा प्रयास रहा है; जिससे आने वाली पीढ़ी उस उस भयावह काल के विषय मे पढ़कर जान सके।आपके इस मानवीय संवेदनात्मक व सराहनीय समीक्षा के लिए आपका अतिशय आभार सर जी💐🙏💐 आप स्वयं एक उच्चकोटि के लेखक,विचारक , समीक्षक एवं सम्मानित प्राध्यापक हैं। अतःआपकी समीक्षा से यह लेख संग्रह कोरोना डायरी और भी महत्वपूर्ण हो गयी। भविष्य में भी हमारी रचनाओं की ऐसे ही समीक्षा की हमें आपसे आशा है।
    आपको कोटिशः धन्यवाद, हमारी पूरी टीम की ओर से आपका सादर आभार
    💐💐💐🙏🙏🙏

    ------सुश्री गीता उपाध्याय'मंजरी'

    जवाब देंहटाएं
  6. अति सुन्दर सराहनीय व सकारात्मकता से परिपूर्ण प्रतिक्रियात्मक समीक्षा आदरणीय शर्मा सर जी 🙏🙏🙏🙏
    निःसंदेह कोरोना की डायरी संकलन एक अद्भुत व ऐतिहासिक संग्रह के रूप में हमारे हाथ में आयी । इस कालजयी संग्रह को सफल बनाने में वरिष्ठ व अनुभवी साहित्यकार आदरणीय श्री श्यामनारायण जी के द्वारा सूक्ष्मता से की गयी समीक्षा अथक श्रम व सुशीला साहू जी के कुशल संपादन का ही सुखद परिणाम है।हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हम इस संकलन में सहभागी बने।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इन्हें भी पढ़ते चलें...

समर कैंप के प्रथम दिवस स्वामी आत्मानंद शा. चक्रधर नगर स्कूल में बैंकिंग साक्षरता पर हुआ आयोजन /छात्र-छात्राओं को ग्रामीण बैंक चक्रधर नगर का भ्रमण करवाया गया

समर कैंप के प्रथम दिवस स्वामी आत्मानंद शा. चक्रधर नगर स्कूल में बैंकिंग साक्षरता पर हुआ आयोजन/ छात्र-छात्राओं को ग्रामीण बैंक चक्रधर नगर का भ्रमण करवाया गया रायगढ़। स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में समर केम्प का आयोजन 20 मई को प्रारम्भ हुआ। विद्यालय प्रबंधन की ओर से प्रथम दिवस बैंकिंग साक्षरता पर कार्यक्रम रखा गया था। विद्यालय प्राचार्य के आग्रह पर आयोजन के प्रथम दिवस स्टेट बैंक के सेवा निवृत अधिकारी प्रमोद शराफ एवं स्टेट बैंक के वित्तीय साक्षरता काउंसलर राजकुमार शर्मा उपस्थित हुए।बैंकिंग साक्षरता को लेकर बुनियादी जानकारियों के साथ दोनों ही अधिकारियों ने बच्चों से सार्थक संवाद किया। उन्होंने विस्तारपूर्वक बैंक से जुड़े कार्यों की सिलसिलेवार जानकारी दी। बैंक में किस तरह पैसे जमा किये जाते हैं, किस तरह पैसे निकाले जाते हैं, किस तरह इनके फॉर्म भरे जाते हैं, कितनी प्रकार की खाताएं बैंक में खोली जा सकती हैं , बैंक के लेनदेन में किस तरह की सावधानियां रखनी चाहिए,  इन सारी बातों पर अधिकारियों की ओर से बहुत महत्वपूर्ण संवाद स्थापित किये गए । छात्र-छात्राओं से ज

कौन हैं ओमा द अक और इनदिनों क्यों चर्चा में हैं।

आज अनुग्रह के पाठकों से हम ऐसे शख्स का परिचय कराने जा रहे हैं जो इन दिनों देश के बुद्धिजीवियों के बीच खासा चर्चे में हैं। आखिर उनकी चर्चा क्यों हो रही है इसको जानने के लिए इस आलेख को पढ़ा जाना जरूरी है। किताब: महंगी कविता, कीमत पच्चीस हजार रूपये  आध्यात्मिक विचारक ओमा द अक् का जन्म भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी में हुआ। महिलाओं सा चेहरा और महिलाओं जैसी आवाज के कारण इनको सुनते हुए या देखते हुए भ्रम होता है जबकि वे एक पुरुष संत हैं । ये शुरू से ही क्रान्तिकारी विचारधारा के रहे हैं । अपने बचपन से ही शास्त्रों और पुराणों का अध्ययन प्रारम्भ करने वाले ओमा द अक विज्ञान और ज्योतिष में भी गहन रुचि रखते हैं। इन्हें पारम्परिक शिक्षा पद्धति (स्कूली शिक्षा) में कभी भी रुचि नहीं रही ।  इन्होंने बी. ए. प्रथम वर्ष उत्तीर्ण करने के पश्चात ही पढ़ाई छोड़ दी किन्तु उनका पढ़ना-लिखना कभी नहीं छूटा। वे हज़ारों कविताएँ, सैकड़ों लेख, कुछ कहानियाँ और नाटक भी लिख चुके हैं। हिन्दी और उर्दू में  उनकी लिखी अनेक रचनाएँ  हैं जिनमें से कुछ एक देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। ओमा द अक ने

समर केम्प में चक्रधरनगर स्कूल के बच्चों ने संगीत और गायकी का लिया आनंद / प्रसिद्ध युवा बांसुरी वादक विकास तिवारी ने दी अपनी प्रस्तुति

रायगढ़। स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में समर कैंप के तहत 27 मई को बांसुरी वादक विकास कुमार तिवारी ने अपनी प्रस्तुति दी।  संस्था के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार  शराफ ने छात्र-छात्राओं से आगन्तुक अतिथि विकास कुमार तिवारी का परिचय कराया साथ ही उन्हें संबोधन एवं अपनी सांगीतिक प्रस्तुति हेतु आमंत्रित किया। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रधान पाठक विकास कुमार तिवारी ने शिक्षा एवं संगीत के क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा किया । संगीत जैसी कला की बारीकियों का जीवन में क्या महत्व है इस पर उन्होनें कुछ बातें रखीं। उन्होंने बांसुरी वादन की कुछ बेहतरीन प्रस्तुतियां  दीं जिसका बच्चों ने आनंद उठाया। कुछ बच्चों ने समर केम्प पर फीडबैक भी दिया। इस अवसर पर प्राचार्य राजेश डेनियल ने बच्चों एवं स्टॉफ को संबोधित करते हुए कहा कि यह सत्र हमारे लिए उपलब्धियों भरा रहा। न केवल विद्यालय में अच्छे परीक्षा परिणाम आए बल्कि अन्य गतिविधियों में भी वर्षभर यहां के छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। समर कैंप भी हमारे लिए एक उपलब्धियों भरा यादगार आयोजन है जिसमें अनेक प्रकार की गतिव

युवा मोटिवेशनल स्पीकर प्रतिची पटेल एवं हैंडराइटिंग स्पेशलिस्ट जीआर देवांगन सर ने बच्चों को किया संबोधित। समर केम्प के बच्चों को दोनों ने दिए जीवन में आगे बढ़ने के टिप्स

रायगढ़। स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में समर कैंप में हैंडराइटिंग स्पेशलिस्ट जीआर देवांगन एवं युवा मोटिवेशनल स्पीकर प्रतिची पटेल का आगमन हुआ।  प्रतिची पटेल का सम्बोधन सर्वप्रथम विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार शराफ़ ने दोनों अतिथियों का परिचय विद्यालय के छात्र-छात्राओं से करवाया। इस अवसर पर जीआर देवांगन ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों की हैंड राइटिंग अगर सुंदर हो तो उन्हें परीक्षाओं में इसका लाभ मिलता है। मूल्यांकन कर्ता इससे प्रभावित होते हैं । जी आर देवांगन हैंड राइटिंग स्पेशलिस्ट हैंडराइटिंग से बच्चों के व्यक्तित्व का पता चलता है । इस दिशा में थोड़ी सी मेहनत से बच्चे अपना हैंडराइटिंग सुधार सकते हैं। हां यह जरूर है कि इसके लिए उन्हें सतत अभ्यास और मार्गदर्शन की जरूरत पड़ेगी। उन्हें कर्सिव राइटिंग को लेकर बच्चों को बहुत से उपयोगी टिप्स भी दिए और सवाल जवाब के माध्यम से बच्चों ने बहुत सी बातें उनसे सीखीं। आयोजन में पधारे दूसरे अतिथि वक्ता युवा मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में ख्यात, हाल ही में सीबीएसई 12वीं बोर्ड एग्जाम उत्तीर्ण प्रतिची

पुलिस एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने आग पर काबू पाने के बताए तरीके /शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर में समर कैंप के तहत किया गया प्रायोगिक प्रदर्शन

पुलिस एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने आग पर काबू पाने के बताए तरीके शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर में समर कैंप के तहत किया गया प्रायोगिक प्रदर्शन रायगढ़। स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में पुलिस एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने आग पर काबू पाने के विभिन्न तरीकों का  बच्चों के समक्ष प्रायोगिक प्रदर्शन किया। संस्था के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार शराफ ने सर्वप्रथम समस्त अधिकारियों का स्कूली बच्चों से परिचय करवाया।   अग्निशमन सेवा से जुड़े अधिकारी खलखो सर ने इस अवसर पर सिलिंडर में आग लग जाने की स्थिति में किस तरह अपना बचाव किया जाए और आग लगने से आस पड़ोस को कैसे बचाए रखें , इस संबंध में बहुत ही अच्छे तरीके से जानकारी दी और अग्निशमन से जुड़े विभिन्न यंत्रों का उपयोग करने की विधि भी  उन्होंने बताई। उनके साथी जावेद सिंह एवं अन्य अधिकारियों ने भी उनका सहयोग किया। बच्चों ने स्वयं डेमोंसट्रेशन करके भी आग पर काबू पाने की विधियों का उपयोग किया। दैनिक जीवन में काम आने वाली ये जानकारियां बहुत ही सारगर्भित रहीं। इस डेमोंसट्रेशन को स्टॉफ के सभी सदस्

समर केम्प का दूसरा दिन 'तारे जमीं पर' फिल्म के प्रदर्शन और व्यावसायिक कैंपस के भ्रमण पर केंद्रित रहा /स्वामी आत्मानंद शा. उच्चतर मा. विद्यालय चक्रधर नगर के छात्रों ने अपना अनुभव साझा किया

समर केम्प का दूसरा दिन 'तारे जमीं पर' फिल्म के प्रदर्शन और व्यावसायिक कैंपस के भ्रमण पर केंद्रित रहा स्वामी आत्मानंद शा. उच्चतर मा. विद्यालय चक्रधर नगर के छात्रों ने अपना अनुभव साझा किया रायगढ़ । स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में समर कैंप के द्वितीय दिवस का आयोजन हुआ। सर्वप्रथम संस्था के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार शराफ द्वारा बच्चों को संबोधित किया गया। उन्होंने शिक्षाप्रद फिल्मों को लेकर बच्चों को बहुत सारी जानकारियां प्रदान कीं। उसके बाद शिक्षक स्टाफ राजा राम सरल और के पी देवांगन के तकनीकी सहयोग से प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को बड़े पर्दे पर 'तारे जमीं पर' नामक फिल्म दिखाई गई। यह फिल्म मूलतः बच्चों के मनोविज्ञान पर केंद्रित है । इस फिल्म का बच्चों ने खूब आनंद लिया। इस फिल्म को लेकर शालेय परिवार की शिक्षिकाओं नायर मेडम, वसुंधरा पांडेय मेडम, भगत मेडम, कनक मेडम एवम शारदा प्रधान ने बच्चों से बातचीत की एवं उनके विचार भी जानने का प्रयास किया। इस अवसर पर बच्चों की ओर से कीर्ति यादव,कशिश डनसेना,बरखा तम्बोली,मुस्कान नामदेव ने फ़िल्म को ल

कथा कहानी के नाम रहा समर कैंप का आखिरी दिन /बच्चों ने केम्प के अनुभवों पर साझा किया अपना फीडबैक

रायगढ़।स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में 10 दिवसीय समर कैंप का आयोजन 30 मई को संपन्न हुआ।  पहला सत्र कहानी सुनने सुनाने और उस पर सवाल जवाब का सत्र था। पहले सत्र में व्याख्याता रमेश शर्मा द्वारा बच्चों के लिए लिखी गईं नौ में से चुनी हुईं अपनी तीन कहानियाँ मीठा जादूगर, गणित की दुनिया और नोटबुक, जिसे विशेष तौर पर स्कूल शिक्षा विभाग एससीईआरटी रायपुर द्वारा बच्चों के लिए ही  प्रकाशित किया गया है, पढ़कर सुनाई गईं। इन कहानियों को सुनाने के बाद उन्होंने बच्चों से कई सवाल जवाब किये जिनके उत्तर बच्चों की ओर से दिए गए। बच्चों के उत्तर सुनकर उपस्थित छात्र छात्राओं एवं शिक्षक शिक्षिकाओं को यह महसूस हुआ कि बच्चों ने इन कहानियों को कई डाइमेंशन से समझने की कोशिश की है और उसे अपने जीवन से जोड़कर भी देखने का प्रयास किया है। कहानी सुनाने और सुनने की इस प्रक्रिया में बच्चों ने यह स्वीकार किया कि कहानी कला संप्रेषण की एक सशक्त विधा है और  इसके माध्यम से बहुत सी बातें रोचक ढंग से सीखी जा सकती हैं। इस अवसर पर कहानी लिखने की कला पर भी बातचीत हुई। इसी क्रम में व्याख्याता रश्मि

डॉ मनीष बेरीवाल ने सीपीआर पर और पीएस खोडियार ने कला एवं जीवन कौशल के अन्तर्सम्बन्धों को लेकर बच्चों से अपनी बातें साझा करीं। चक्रधर नगर स्कूल के समर केम्प में उनके व्याख्यान हुए

चक्रधर नगर स्कूल के समर कैंप में बच्चों को डॉक्टर मनीष बेरीवाल एवं रिटायर्ड प्राचार्य पी.एस. खोडियार ने संबोधित किया    रायगढ़। स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्रधर नगर रायगढ़ में समर कैंप के तहत 24 मई को रिटायर्ड प्राचार्य पी.एस. खोडियार एवं डॉ मनीष बेरीवाल का अतिथि वक्ता के रूप में आगमन हुआ।कार्यक्रम के आरंभ में संस्था के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार  शराफ ने छात्र-छात्राओं से आगन्तुक अतिथियों का परिचय कराया एवम उन्हें संबोधन हेतु आमंत्रित किया।पहले क्रम पर  खोडियार सर ने  ललित कला एवं जीवन कौशल को लेकर बच्चों को संबोधित किया। अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ जीवन को किस तरह आसान और सुंदर बनाया जाए , इस राह में ललित कलाओं का क्या योगदान है,  जीवन जीना भी किस तरह एक कला है , समाज में कैसे अपने लिए हम एक सम्मानित स्थान बना सकते हैं, इन प्रश्नों को लेकर उन्होंने बहुत विस्तार पूर्वक अपने अनुभवों के माध्यम से महत्वपूर्ण बातें विद्यार्थियों के बीच साझा किया। दूसरे क्रम पर समर कैंप के अतिथि डॉ मनीष बेरीवाल ने बच्चों को संबोधित किया।उन्होंने सीपीआर के संबंध में विस्तार पूर्

समकालीन कविता और युवा कवयित्री ममता जयंत की कविताएं

समकालीन कविता और युवा कवयित्री ममता जयंत की कविताएं दिल्ली निवासी ममता जयंत लंबे समय से कविताएं लिख रही हैं। उनकी कविताओं को पढ़ते हुए यह बात कही जा सकती है कि उनकी कविताओं में विचार अपनी जगह पहले बनाते हैं फिर कविता के लिए जरूरी विभिन्न कलाएं, जिनमें भाषा, बिम्ब और शिल्प शामिल हैं, धीरे-धीरे जगह तलाशती हुईं कविताओं के साथ जुड़ती जाती हैं। यह शायद इसलिए भी है कि वे पेशे से अध्यापिका हैं और बच्चों से रोज का उनका वैचारिक संवाद है। यह कहा जाए कि बच्चों की इस संगत में हर दिन जीवन के किसी न किसी कटु यथार्थ से वे टकराती हैं तो यह कोई अतिशयोक्ति भरा कथन नहीं है। जीवन के यथार्थ से यह टकराहट कई बार किसी कवि को भीतर से रूखा बनाकर भाषिक रूप में आक्रोशित भी कर सकता है । ममता जयंत की कविताओं में इस आक्रोश को जगह-जगह उभरते हुए महसूसा जा सकता है। यह बात ध्यातव्य है कि इस आक्रोश में एक तरलता और मुलायमियत है। इसमें कहीं हिंसा का भाव नहीं है बल्कि उद्दात्त मानवीय संवेदना के भाव की पीड़ा को यह आक्रोश सामने रखता है । नीचे कविता की कुछ पंक्तियों को देखिए, ये पंक्तियाँ उसी आक्रोश की संवाहक हैं - सोचना!  सोचना

अख़्तर आज़ाद की कहानी लकड़बग्घा और तरुण भटनागर की कहानी ज़ख्मेकुहन पर टिप्पणियाँ

जीवन में ऐसी परिस्थितियां भी आती होंगी कि जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। (हंस जुलाई 2023 अंक में अख्तर आजाद की कहानी लकड़बग्घा पढ़ने के बाद एक टिप्पणी) -------------------------------------- हंस जुलाई 2023 अंक में कहानी लकड़बग्घा पढ़कर एक बेचैनी सी महसूस होने लगी। लॉकडाउन में मजदूरों के हजारों किलोमीटर की त्रासदपूर्ण यात्रा की कहानियां फिर से तरोताजा हो गईं। दास्तान ए कमेटी के सामने जितने भी दर्द भरी कहानियां हैं, पीड़ित लोगों द्वारा सुनाई जा रही हैं। उन्हीं दर्द भरी कहानियों में से एक कहानी यहां दृश्यमान होती है। मजदूर,उसकी गर्भवती पत्नी,पाँच साल और दो साल के दो बच्चे और उन सबकी एक हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा। कहानी की बुनावट इन्हीं पात्रों के इर्दगिर्द है। शुरुआत की उनकी यात्रा तो कुछ ठीक-ठाक चलती है। दोनों पति पत्नी एक एक बच्चे को अपनी पीठ पर लादे चल पड़ते हैं पर धीरे-धीरे परिस्थितियां इतनी भयावह होती जाती हैं कि गर्भवती पत्नी के लिए बच्चे का बोझ उठाकर आगे चलना बहुत कठिन हो जाता है। मजदूर अगर बड़े बच्चे का बोझ उठा भी ले तो उसकी पत्नी छोटे बच्चे का बोझ उठाकर चलने में पूरी तरह असमर्थ हो च